Tuesday, December 17, 2013

अक्स.

मुझसे मिलके, मेरा अक्स ले गया |
बाजीगर था, दिल जो शख्श ले गया ||

- प्रशांत.
12.17.13

Friday, May 10, 2013

गर्मी.


अलसायी धूप,
दसहरी आम.

चाय की चुस्की,
शरबत की शाम.

हाथ का गिरना.
ढुलना.
ढुलते ही जाना.

शायद,
पत्तों में,
बादल पे,
चुपके से,
आ पहुंची है,

गर्मी.



प्रशांत.
माय १०, २०१३.


Monday, April 22, 2013

Phool.

Ek waqt tha.

Phool soonghnei baagon mein jaate the,
Nangey pair ghaas par lot.te the,
Daud lagaate the.

Aaj phoolon se allergy hai.
Ghaas mein potty padi kutton ki...

Bas ek wohi asli,
Baki sab ssaala farzee hai:-(

PrashOriginal.

Sunday, December 16, 2012

Aao.

Aao, baitho.
Fir baat chhide.
Kuchch zindagi ki,
Kuchch pyaar ki.
Kuchch monsoon,
Bauchaar ki.

Aaa, baitho.
Fir raag chhide.
Kuchch dard ke,
Kuchch tyaag ke.
Kuchch chhipe, dabe,
Anurag ke.

Aaa, baitho.
Fir waqt ruke.
Kuchch baadal mein,
Kuchch dhoop mein.
Kuchch saral, madir,
Tere roop mein.

Aao...:-)

- PrashOriginal.
12.16.12.

Tuesday, January 31, 2012

जीत.

यूँ लड़ता रहा,
सब वार गया.

बस जीत मिली,
तुझे हार गया.

- प्रश्. 1.30.2012.

Thursday, January 19, 2012

जो आये ले जाए...

मैले कपडे,
कुचली आँखें,
कुकडे अकड़े हाथ.

एक रात,
हमने भी गुजारी,
उस पगली के साथ.

सहमी, हकली,
वहशी कुम्हली,
सिसक फफक बस रोई.

63 बरस,
करोड़ों चीखें,
पर चीर भरे न कोई!

बेटी थी,
अब बहु कहें, बस..
हक, जता, टूर जाएँ..

वेलेंटाइन डे,
सभी मना लें,
२६ छुट्टी मनाएं.

क्या कसाब,
क्या पप्पू, गांधी,
जो आये ले जाए...

लड्डू संग,
बंटेगा गणतंत्र,
जो भी मिले, बताएं!

- प्रशांत. १.१९.२०१२.
गणतंत्र दिवस, जनवरी २६ पर.

Friday, January 13, 2012

बरस पड़ी लू ...

कठिन. कर्कश. कैकय.

दंश जो भरा था मैंने,
निर्मम उस नगर में,
छीन कर जीने के लिए.

कुछ न शेष रहा.

कांटे कुम्हलाये ...
बरस पड़ी लू ...
सर्वस्व गया झूम.

जलती उस दुपहरी,
उड़ता दुपट्टा लिए,
चौराहे की भीड़ में,

जब मुझको मिली..

"तुम"

- प्रशांत.

देख न सका उनमें...

कल दो आँखों से मिला मैं.
पर देख न सका उनमें.
और खुद झुक गया.

सर्वस्व.
सत्-गुण.
सर्व सीमित सुख.
सब कुछ देकर,
जो शेष रहा,
वह थी दो आँखें...

..पर देख न सका उनमें.
और खुद झुक गया.

आखिर...

माँ की जो थी.

- प्रश्. १.१३.२०१२.

कल एक बुत से मिला मैं...

एक बुत से मिला मैं.

वह मुस्कुरा रहा था...
और मैं,
नज़रें न मिला पा रहा था.

हाथ फेरा सर पे मेरे,
और पलटा, जाने लगा.

"रुको.....", मैं चीखा...
किन्तु वह न रुका.

जाते जाते, एक बयार दे गया.
बस इतनी, कि उसकी खुशबू मात्र शेष रही.
और जान गया मैं... विकल हो रोने लगा:

"माँ ............."

- प्रशांत. १.१३.२०१२.

मर जाता हूँ मैं!

जब भी बिन आंटे, रोटी के घर जाता हूँ मैं,
मुस्कुरा देती है बिटिया, और मर जाता हूँ मैं.

- इन्टरनेट के एक अज्ञात शेर से प्रेरित. उन घरों को समर्पित जहाँ बच्चे आज भी इसलिए जल्दी सो जाते हैं कि भूख लग जायेगी.

Tuesday, January 10, 2012

खट्टा.

ज़ख्मों का हिसाब रखते रखते,
अपने तो दिमाग का दही हो गया.

ता उम्र दूध दूध चिल्लाता फिरा...

अब खट्टा ही जो भाने लगा,
सब साला सही हो गया!!!

- प्रशांत. १.१०.१२.

Wednesday, January 4, 2012

हक चाहिए उसे...

हक चाहिए उसे,
विवाहित से प्यार का...
समाज से लड़ने का..
कोंस्टेबल से अकड़ने का.

कैसे बताएं बावले को ..
तुझ जैसे को मिलने लगें हक, तो

हर युवा में एक अन्ना जलता..
हर झुग्गी में एक जिम मोर्रिसन पलता...

और हर कसाब के आगे, एक जिंदा भगत सिंह चलता.

एक माँ नहीं पलती.

वह धोती में आया, इक राष्ट्र खिला गया,
इस डेनिम जेनरेशन से एक माँ नहीं पलती.

वह नंगा था आधा, पर उत्तम था मानुष..
अब ढकता सब है, मर्यादा नहीं ढकती.

Thursday, August 18, 2011

१२१ करोड में कम स कम १ लाख तो वीर बनाओ?

क्यूँ हर वो चीज़ जो पूरे समाज को खा रही है...

पहले त्रासदी बनती है...

फिर अवतार की प्रतीक्षा होती है,

तब सालों का ज़मीर जागता है?

क्यूँ गाँधी और अन्ना के बगैर सारे बकरियों की तरह इधर उधर भागते हैं?

कब तक कृष्ण और राम के भरोसे देश चलेगा?

पढाओ अपने बच्चों को... जो मिले उन्हें भी बताओ.

१२१ करोड में कम स कम १ लाख तो वीर बनाओ?

- प्रश्. ८/१८/२०११.

हम उनमें खादी अपनी सुखाया करते हैं!

जो तूफान ताज-ए-हुकूमत उडाया करते हैं,
हम उनमें खादी अपनी सुखाया करते हैं!

सत्यमेव जयते!

- प्रशांत. ८/१७/२०११. (इन्टरनेट/ समाचारों से प्रेरित)