मैले कपडे,
कुचली आँखें,
कुकडे अकड़े हाथ.
एक रात,
हमने भी गुजारी,
उस पगली के साथ.
सहमी, हकली,
वहशी कुम्हली,
सिसक फफक बस रोई.
63 बरस,
करोड़ों चीखें,
पर चीर भरे न कोई!
बेटी थी,
अब बहु कहें, बस..
हक, जता, टूर जाएँ..
वेलेंटाइन डे,
सभी मना लें,
२६ छुट्टी मनाएं.
क्या कसाब,
क्या पप्पू, गांधी,
जो आये ले जाए...
लड्डू संग,
बंटेगा गणतंत्र,
जो भी मिले, बताएं!
- प्रशांत. १.१९.२०१२.
गणतंत्र दिवस, जनवरी २६ पर.
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Thursday, January 19, 2012
Thursday, August 18, 2011
१२१ करोड में कम स कम १ लाख तो वीर बनाओ?
क्यूँ हर वो चीज़ जो पूरे समाज को खा रही है...
पहले त्रासदी बनती है...
फिर अवतार की प्रतीक्षा होती है,
तब सालों का ज़मीर जागता है?
क्यूँ गाँधी और अन्ना के बगैर सारे बकरियों की तरह इधर उधर भागते हैं?
कब तक कृष्ण और राम के भरोसे देश चलेगा?
पढाओ अपने बच्चों को... जो मिले उन्हें भी बताओ.
१२१ करोड में कम स कम १ लाख तो वीर बनाओ?
- प्रश्. ८/१८/२०११.
तब सालों का ज़मीर जागता है?
क्यूँ गाँधी और अन्ना के बगैर सारे बकरियों की तरह इधर उधर भागते हैं?
कब तक कृष्ण और राम के भरोसे देश चलेगा?
पढाओ अपने बच्चों को... जो मिले उन्हें भी बताओ.
१२१ करोड में कम स कम १ लाख तो वीर बनाओ?
- प्रश्. ८/१८/२०११.
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Ram
हम उनमें खादी अपनी सुखाया करते हैं!
जो तूफान ताज-ए-हुकूमत उडाया करते हैं,
हम उनमें खादी अपनी सुखाया करते हैं!
सत्यमेव जयते!
- प्रशांत. ८/१७/२०११. (इन्टरनेट/ समाचारों से प्रेरित)
हम उनमें खादी अपनी सुखाया करते हैं!
सत्यमेव जयते!
- प्रशांत. ८/१७/२०११. (इन्टरनेट/ समाचारों से प्रेरित)
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