सर्वोत्तम काव्य संकलन
एक प्रयास.
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अटल बिहारी वाजपेयी
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अटल बिहारी वाजपेयी
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Saturday, April 24, 2010
ऊँचाई.
जो जितना ऊँचा,
उतना एकाकी होता है,
हर भार को स्वयं ढोता है,
चेहरे पर मुस्कानें चिपका,
मन ही मन रोता है।
मेरे प्रभु!
मुझे इतनी ऊँचाई कभी मत देना,
गैरों को गले न लगा सकूँ,
इतनी रुखाई कभी मत देना।
- अटल बिहारी वाजपेयी.
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